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चाय बेच युवा कमा रहे लाखो - करोड़ो, जानिए इनकी सफलता की कहानी
एमबीए चायवाला (MBA CHAI WALA)
25 साल के इन नौजवान के चाय का धंधा इतना चला कि टर्नओवर करोड़ों का हो गया। 20 साल की उम्र में MBA की तैयारी करने घर से निकले प्रफुल्ल बिल्लोर को भी पता नहीं था कि यही MBA शब्द एक दिन उन्हें दुनियाभर में मशहूर बना देगा। इंदौर (indore) से अहमदाबाद (Ahmedabad) पहुंचे प्रफुल्ल का सपना IIM में एडमिशन पाना और शानदार पैकेज पर जॉब हासिल करना था, लेकिन जब MBA में सफलता नहीं मिला तो प्रफुल्ल ने चाय का ठेला लगाने का सोचा और नाम रखा * MBA चायवाला *
बिजनेस शुरू करने के लिए पैसे, प्रफुल्ल के पास नहीं थे। ऐसे में प्रफुल्ल ने ऐसा बिजनेस करने के बारे में सोचा जिसमें पूंजी भी कम लगे और आसानी से भी हो जाए। बस यहीं से चाय का काम शुरू करने का आइडिया उनके दिमाग में आया। काम की शुरुआत के लिए प्रफुल्ल ने अपने पिता से झूठ बोलकर पढ़ाई के नाम पर 10 हजार रुपए मांगे। इन्हीं पैसों से प्रफुल्ल ने चाय का ठेला लगाना शुरू किया।
पहले दिन प्रफुल्ल बिल्लौरे की एक भी चाय नहीं बिकी तो उन्होंने सोचा कि अगर कोई मेरे पास चाय पीने नहीं आ रहा तो क्यों ना मैं खुद उसके पास जाकर अपनी चाय ऑफर करूं। प्रफुल्ल वेल एजुकेटेड हैं, अच्छी इग्लिश बोलते हैं, उनकी यह तरकीब काम आई और सब बोलते कि चाय वाला भी अंग्रेजी बोलता है, और चाय की दुकान चल निकली। दूसरे दिन 6 चाय बेची पर चाय 30 रुपए के हिसाब से 150 रुपए कमाए। प्रफुल्ल सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक जॉब करते थे और शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक अपने चाय का स्टॉल लगाते थे। काम अच्छा चलने लगा 600 कभी 4000 कभी 5000 तक सेल होने लगे और उन्होंने अपनी जॉब छोड़ दी और अपना पूरा फोकस अपने चाय पर किया।
*MBA चाय वाला* धीरे-धीरे फेमस हो गया। अब लोकल इवेंट, म्यूजिकल नाइट, बुक एक्सचेंज प्रोग्राम, वुमन एम्पावरमेंट, सोशल कॉज, ब्लड डोनेशन जैसी हर जगह *MBA चाय वाला* दिखाई देता। प्रफुल्ल ने वेलेंटाइन के दिन *सिंगल के लिए मुफ्त चाय* दी, जो वायरल हो गई और वहां से उनको और भी ज्यादा पॉपुलेरिटी मिली। अब उन्हें और भी बड़े ऑर्डर मिलने लगे। आज *MBA चाय वाला* नेशनल और इंटरनेशनल इवेंट करते हैं। प्रफुल्ल ने 300 स्क्वायर फीट में अपना कैफे खोला और पूरे भारत में फ्रेंचाइजी दी। एक वक्त जिन MBA संस्थानों में जाकर पढ़ाई करना प्रफुल्ल बिल्लोरे का सपना था। आज वही संस्थान प्रफुल्ल को अपने यहां बतौर मैनेजमेंट गुरू लेक्चर देने के लिए बुलाते हैं। महज 25 साल की उम्र में उनका नेटवर्थ सालाना 3 से 4 करोड़ का है। आज देश के 22 शहरों में और लंदन में भी *MBA चायवाला* के नाम से उसके आउटलेट हैं। बाकी के देशों में भी फ्रेंचाइजी पर बात चल रही है।
चाय सुट्टा बार (Chai Sutta Bar)
भारत जैसे देश में जहां माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि उनका लड़की या लड़का या तो आईएएस बने या फिर इंजीनियरिंग सेक्टर में काम कर रहे। कुछ नहीं तो वह सरकारी नौकरी ही कोई करे। ऐसे में अगर कोई लड़का जो आईएएस की तैयारी कर रहा हो और वह उसे छोड़कर एक चाय की दुकान खोलने की जिद्द कर बैठे तो क्या होगा। वही जो आप सोच रहे हैं। माता-पिता गुस्सा हो जाएंगे और रिश्तेदार इसे जीवन की सबसे बड़ी गलती बताएंगे। लेकिन किसी ने सच कहा है कि अगर कुछ करने की चाहत है तो धीरे-धीरे मुश्किलें समाप्त होने लगती हैं। ऐसी ही एक कहानी इंदौर के अनुभव दूबे की, जो घर से निकले थे IAS बनने, लेकिन फिर दोस्त के साथ मिलकर खोली चाय की दुकान *चाय सुट्टा बार* और फिर देखते-देखते कंपनी का टर्नओवर 100 करोड़ के पार पहुंच गया।
अनुभव दूबे ने अपनी शुरुआती पढ़ाई यानी क्लास 1 से 8 तक गांव के स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद की पढ़ाई उन्होंने इंदौर से पूरी की। फिर घरवालों ने यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली भेजा जहां उनकी मुलाकात उनके स्कूल दोस्त और *चाय सुट्टा बार* कंपनी के को-फाउंडर आनन्द नायक से हुई। यहीं से शुरुआत हुई कंपनी *चाय सुट्टा बार* के आइडिया पर काम करने की।
शुरुआत में पैसे की कमी होने की वजह से अनुभव और आनन्द ने सेकेंड हैंड फर्नीचर खरीदकर अपने बिजनेस को शुरू किया। पैसे की इतनी किल्लत थी कि उन्हें हाथ से लिखा बैनर दुकान के सामने लगाना पड़ा। शुरुआती दिनों की कठिनाई के बाद बिजनेस निकल पड़ा। और उन्होंने फिर पलटकर पीछे नहीं देखा।
कभी तीन लाख में शुरू की गई कंपनी का आज सालान टर्नओवर 100 करोड़ का पार पहुंच गया है। अनुभव के अनुसार मौजूदा समय में देश के 165 जगहों पर कंपनी के आउटलेट्स हैं। इसके 250 से अधिक परिवार जोकि कुल्हड़ बनाते हैं, वो सभी भी इसी कंपनी पर पूरी तरह से निर्भर करते हैं।
चायोस (Chaayos)
आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग करने के बाद नितिन ओपेरा सॉल्यूशंस में जॉब करने लगे। वह अच्छी चाय पीने के शौकीन थे। नितिन जब छोटे थे तो उनकी मां ने उन्हें चाय बनाना सिखाया था। अमरीका में रहने के दौरान एक रात डिनर के बाद वह एक कप अच्छी चाय पीने की इच्छा से निकले, लेकिन ऐसी कोई जगह नहीं ढूंढ पाए, जहां मनपसंद चाय मिल सके। तब उनके जेहन में विचार पनपा कि क्यों न भारत में ऐसा कोई स्टार्टअप शुरू किया जाए, जो लोगों के लिए अच्छी चाय का अड्डा हो और वे सुकून से चाय की चुस्की का आनंद ले सकें।
इस बीच उनकी मुलाकात आईआईटी दिल्ली से स्नातक राघव वर्मा से हुई, जिसके साथ बाद में उन्होंने अपना आइडिया डिस्कस किया और दोनों ने इस पर काम करने का मन बनाया। दोनों ने अपनी जॉब छोड़ी और 2012 में गुडग़ांव में अपने स्टार्टअप चायोस का पहला आउटलेट खोला। शुरुआत में उन्हें चुनौतियां फेस करने पड़ी। लोग हैरान थे कि आईआईटी ग्रेजुएट अच्छी खासी जॉब छोडक़र चाय बेचने लगा है। लेकिन उनकी नई सोच और चाय के साथ एक्सपेरिमेंट्स ने चाय की चुस्कियों के शौकीनों का दिल जीत लिया।
दोनों ने शुरुआत से ही चाय की क्वालिटी का पूरा ख्याल रखा व अलग-अलग फ्लेवर की चाय ग्राहकों को उपलब्ध कराने लगे। साथ ही हाईजीन पर विशेष ध्यान दिया। धीरे-धीरे उनका यह आउटलेट चल निकला, फिर उन्होंने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, चंडीगढ़, मुंबई जैसे शहरों में भी अपने आउटलेट खोल बिजनेस को विस्तार देना शुरू कर दिया और कामयाबी की सीढिय़ां चढऩे लगे।
चाय ठेला नोएडा में है और इसे शुरू किया पंकज और नितिन ने मिलकर। इसको किसी आम चाय के ठेले के एक्सपीरियंस को ध्यान में रखकर शुरू किया गया लेकिन यहां लोगों को ताजी चाय ही परोसी जाती है।
एमए इंग्लिश चायवाली
टुकटुकी दास (Tuktuki Das) ने अंग्रेजी में एमए किया है, लेकिन जब काफी प्रयासों के बाद भी नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने चाय की दुकान शुरू करने का फैसला किया. टुकटुकी ने उत्तर 24 परगना के हाबरा स्टेशन पर चाय की दुकान खोली, जिसका नाम उन्होंने रखा * एमए इंग्लिश चायवाली *(MA English Chaiwali). दुकान के इस यूनिक नाम के चलते धीरे-धीरे वो काफी फेमस हो गईं. स्थानीय मीडिया ने भी उनकी कहानी प्रकाशित की.
टुकटुकी के पिता वैन ड्राइवर हैं और उनकी मां की एक छोटी सी किराना दुकान है. पहले पैरेंट्स टुकटुकी की चाय बेचने की योजना से नाखुश थे. उन्होंने उसे समझाया था कि इससे कुछ हासिल नहीं होगा, बल्कि लोग तरह-तरह की बातें करेंगे, लेकिन वो नहीं मानी. दरअसल, टुकटुकी एक *एमबीए चायवाला* की कहानी से प्रेरित थी, जिसके बारे में उसने इंटरनेट पर पढ़ा था. इसलिए उन्होंने विरोध के बावजूद कदम पीछे नहीं खींचें.
टुकटुकी ने कहा कि मुझे लगा कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और इसलिए मैंने *एमबीए चायवाला* की तरह अपनी चाय की दुकान खोली. शुरुआत में जगह मिलना मुश्किल था, लेकिन बाद में मैं इसे ढूंढने में कामयाब रही. अब मैं चाय-नाश्ता बेच रही हूं, चूंकि मेरे पास एमए की डिग्री है, इसलिए मैंने दुकान का नाम इस तरह रखा. टुकटुकी अपना यू-ट्यूब चैनल भी चलाती हैं. उनके कई वीडियो वायरल हो चुके हैं. उन्होंने कहा, *जब से मैं वायरल हुई हूं, तब से बहुत लोग मिलने आते हैं, मुझे लोग हौसला देते हैं*.
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