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Markandey Mahadev: एक लोटा जल चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं होती हैं पूरी
मार्कंडेय महादेव मंदिर कैथी वाराणसी
Markandey Mahadev distance from Varanasi
वाराणसी शहर से करीब 29 किलोमीटर दूर गंगा-गोमती के संगम पर कैथी गांव में विराजते हैं मार्कंडेय महादेव
वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन देशभर के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। आप ट्रेन से बनारस आसानी से पहुंच सकते हैं। बनारस शहर से कैथी में मंदिर जाने के लिए आप कैब या अपने वाहन से जा सकते हैं।
Markandey Mahadev nearest railway station
रजवाड़ी ( Rajwari ) रेलवे स्टेशन
मार्कंडेय महादेव की कहानी
मार्कण्डेय ऋषि का जीवन परिचय
Markandey Mahadev History in Hindi
मार्कंडेय महादेव मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जब मार्कंडेय ऋषि पैदा हुए थे तो उन्हें आयु दोष था। उनके पिता ऋषि मृकण्ड को ज्योतिषियों ने बताया कि बालक की आयु कम है। यह सुनकर मार्कंडेय के माता-पिता चिंतित हो गए। इसके बाद ब्राह्मणों की सलाह पर मार्कंडेय के माता-पिता ने गंगा गोमती संगम तट पर बालू से शिव की मूर्ति बनाकर अर्चना करने लगे। दोनों लोग भगवान शंकर की उपासना में लीन हो गये। जब मार्कण्डेय की उम्र पूरी होने पर यमराज उन्हें लेने आए तो अपने माता-पिता के साथ मार्कंडेय भी भगवान शिव की अराधना में लीन थे।
मार्कंडेय के प्राण लेने के लिए जैसे ही यमराज आगे बढ़े तभी भगवान शिव प्रकट हो गए। इसके बाद यमराज को अपने कदम पीछे बढ़ाने पड़े। भगवान शिव ने कहा कि मेरा भक्त मार्कंडेय सदैव अमर रहेगा और मुझसे पहले उसकी पूजा की जाएगी। तभी से उस जगह पर मार्कंडेय और महादेव की पूजा होने लगी और तभी से यह स्थान मार्कंडेय महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया। लोगों का ऐसा मानना है कि महाशिवरात्रि व सावन माह में यहां राम नाम लिखा बेलपत्र व एक लोटा जल चढाने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं ।
गंगा-गोमती के तट पर बसा कैथी गांव मारकंडेय जी के नाम से विख्यात है। यह गर्ग, पराशर, शृंगी, उद्याल आदि ऋ षियों की तपोस्थली है। इसी स्थान पर राजा दशरथ को पुत्र प्राप्ति के लिए शृंगी ऋषि ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था। इसके परिणाम स्वरूप राजा दशरथ को चार पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न प्राप्त हुए थे। यही वह तपोस्थली है, जहां राजा रघु द्वारा ग्यारह बार हरिवंशपुराण का परायण करने पर उन्हें उत्तराधिकारी प्राप्त हुआ था। पुत्र कामना के लिए यह स्थल काफी दुर्लभ है।
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